नमस्कार, इस आर्टिकल में indian railway के history के बारे में जानेंगे।रेल का सफर तो सबको पसंद होगा,हर भारतीयों का भारतीय रेल्वे के साथ कुछ न कुछ खट्टा मीठा अनुभव जरूर रहता है। छोटी दूरी हो या लंबी दूरी रेल्वे हमे हर जगह सुविधा प्रदान करता है। लेकिन क्या रेल्वे के इतिहास से परिचित है? या फिर क्या आप रेल्वे के कार्य प्रदली के बारे मे जानते है ,आप का उत्तर चाहे जो हो,पर आपको हमारा ये आर्टिकल जरूर से जरूर पढ़ना चाहिए।
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1831 से शुरू हुई indian railway की सफर आज हर समय नए नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।आज हम हाई स्पीड ट्रेन के तरफ बढ़ गए है। जहा हमारा निरंतर प्रयास ट्रेन की गति को बढ़ाने का होता है। हम इस पर कामयाब भी हो रहे है। लेकिन भारतीय रेल का यह सफर जब शुरू हुआ तो ये आसान नहीं था। यू तो हम सभी जानते है की पूरे दुनिया को रेल यातायात देने का श्रेय यूनाइटेड किंगडम को जाता है,। और वहा पहली पब्लिक ट्रेन चली 27 सितंबर 1825 मे स्टॉककहोम व डार्लिंगटन के बीच । उस समय हमारा देश अंग्रेजों के अधीन था । इसलिए इंग्लैंड से रेल यातायात का सफर भारत मे आने मे ज्यादा समय नहीं लगा। यहा होने वाले उत्पादों को जल्दी बंदरगाहों तक पहुचाने के लिए रेल एक सरल ,सुलभ व किफायती जरिया था । जिसके माध्यम से एक ही समय मे ज्यादा से ज्यादा माल की ढुलाई हो सकती थी। इसलिए यूनाइटेड किंगडम मे ट्रेन के परिचालन शुरू होने के मात्र 7 से 8 साल बाद इसको भारत मे लाने के लिए सोचा जाने लगा। इसके लिए भारत मे 1831 से 33 मे दक्षिण भारत मे यातायात के साधन को बढ़ाने के उद्देश्य से मद्रास (वर्तमान मे चेन्नई )तथा बंगलोर के बीच रेल लाइन बिछाने का विचार आया था ।फिर उसके बाद 1845 मे कलकत्ता व दिल्ली के बीच रेल लाइन का सर्वे हुआ था ,पर किसी कारणवश यहा के लिए रेल लाइन के बिछाने का कार्य अनिश्चित कालीन के लिए रद्द करना पड़ा ।उसके बाद 1850 मे बॉम्बे के दो लाइन पर सर्वे किया गया । ये लाइन थी बॉम्बे से कल्याण व बॉम्बे से ठाणे के बीच थी। पर ये सभी प्रस्तावित सिर्फ कागजों पर ही सीमित था। लेकिन भारत मे सर्वप्रथम रेल 1853 मे बॉम्बे से ठाणे के बीच मात्र 34 किलोमीटर तक चली। इस रेल लाइन को बनाने का कार्य हालांकि 1850 मे ही शुरू हो गया था जिसे पूरा होने मे तीन साल का समय लग गया था। इसको बनाने का कार्य इंडियन पेनिनसुला रेल्वे कंपनी द्वारा किया गया था। उसके बाद भारतीय रेल के इतिहास मे हावड़ा व हूगली के बीच 15 अगस्त 1854 के दिन 24 किलोमीटर भारत की दूसरी रेल दौड़ पड़ी । फिर उसके बाद सम्पूर्ण भारत मे कई मार्गों पर रेल को दौड़ने का कार्य आरंभ हो गया। आइए नजर डालते है भारत मे चली इतिहासिक रेल के बारे मे
भारत मे चली गई कुछ historical रेल :-
1- 1850 मे बॉम्बे व ठाणे के बीच (34 किमी ) भारत मे सर्वप्रथम ट्रेन चली।
2-1854 मे हावड़ा व हूगली (24 किमी ) के बीच दूसरी ट्रेन भारत मे चली।
3-1856 मे मद्रास रेल कंपनी द्वारा वेयसरपेड़ी व वलजह रोड के बीच (63 किमी )
4-1866 मे कलकत्ता को दिल्ली,अमृतसर व बॉम्बे को जोड़ा गया ।
5-1850 से 1868 के बीच भारत मे रेल्वे के विकास के लिए की कंपनियों को बनाया गया । जैसे पूर्वी इंडिया रेल्वे,ग्रेट इंडिया पेनिनसुला रेल्वे ,बरोड एण्ड सेंट्रल इंडिया रेल्वे तथा मद्रास स्टेट रेल्वे इत्यादि।
6-1873 मे दिल्ली व फरुकनगर तक पहली मेट्रिक लाइन ।
7-1881 पहला हिल रेल्वे दार्जिलिंग हिमालयन रेल्वे नैरो गेज
8-1887 बॉम्बे का मशहूर विक्टोरिया टर्मिनस रेल्वे स्टेशन बना ।
9-1891 से थर्ड क्लास कोच मे सौचालय की व्यवस्था हुई।
10- 1903 मे 96 किमी कालका-शिमला नैरो गेज पब्लिक के लिए खोल गया ।
11-1924 मे रेल्वे भरतों बोर्ड का गठन किया गया।
12-1925 मे पहला विद्युतीकरण हार्बर ब्रांच लाइन मे हुआ।
13-1936 मे यात्री कोच मे वातानुकूलन यंत्र लगना शुरू हुआ ।
14-1937 मे बर्मा भारत से अलग हो गया जिससे 3200 किमी रेल नेटवर्क भारत से निकाल गया।
15-1939 से 1942 मे भारत मे रेल कार्य अवरुद्ध हो गए ,उनके जगह रेल्वे वर्क्शाप मे युद्ध के सामग्री बनने
लगे । तथा युद्ध के समाप्ति के पश्चात वह फिर से रेल के कार्य होना शुरू हो गए । तथा इसी बीच युद्ध
ट्रांसपोर्ट बोर्ड का गठन किया गया ।
16-1947 भारत के इतिहास का सबसे स्वर्णिम साल जब भारत अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त हो गया। लेकिन
भारत से पाकिस्तान का बिभाजन हो जाने के बाद कुछ रेल नेटवर्क पाकिस्तान मे चला गया । भारत
ने पाकिस्तान के साथ रेल सामग्री जैसे की कोच ,इंजन तथा अन्य उपकरण भी साझा किया ।
17-1947 से 51 के बीच जब भारत आजाद हो चुका था । तब 42 रेल्वे निकाय का गठन हुआ ।
18-1950 मे भाप लोकोमोटिव का निर्माण चितरंजन मे शुरू हुआ।
19-1952 मे रेल्वे स्टाफ कॉलेज का गठन हुआ।
20- 1957 मे रेल्वे सुरक्षा बल(RPF )गठन हुआ।
21-1961 से DLW वाराणसी व CLW चितरंजन मे विद्युत इंजन का बनना शुरू हो गया।
22-1969 मे न्यू दिल्ली से हावड़ा के बीच 120 किमी रफ्तार की पहली राजधानी एक्स्प्रेस की शुरुवात हुआ।
23-1974 मे रेल इंडिया टेक्निकल एण्ड इकोनॉमिक सर्विस (RITES) का गठन हुआ जो रेल्वे मे तकनीकी
व आर्थिक पहलुवों की विवेचना करता है।
24-1976 मे इंडियन रेल्वे कन्स्ट्रक्शन कंपनी (IRCON) का उदय हुआ जिसका मुख कार्य भारत मे रेल
जाल को पूरी तरीके से फैलाना था ।
25-1984 मे कोलकाता को मेट्रो रेल का उपहार मिल।
26- 1985 से रेल कंप्युटर कृत आरक्षण के शुरुवात हुई।
27-1987 मे रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला मे कोच निर्माण की शुरुवात हुई।
28-1988 मे न्यू दिल्ली व झांसी के बीच पहली सताब्दी ट्रेन चलाई गई। तथा इसी वर्ष कन्टैनर कॉर्पोरैशन
ऑफ इंडिया (CONCOR) प्रकाश मे आया । जिसका कार्य माल की ढुलाई का था ।
29-1998 से कोकण रेल्वे पूरी तरीके से चालित हो गया।
30-1999 दार्जिलिंग हिमालय रेल्वे को (UNESCO) ने विश्व धरोहर घोसीत कर दिया ।
इस तरीके से आज तक रेल्वे मै की नई बदलाव आने शुरू हो गया । जिससे रेल्वे दिन पर दिन ग्राहकों की सेवा मुस्कान के साथ करता चला या रह है।
यह निचे नहार्टीय रेल्वे से सबंधित कुछ यूनिट दिए जा रहे । जिनका स्थान व कार्य भी दर्शाया गया है।
Unit Headquarters Production
Chittranjan Locomotive Works Chittaranjan Electric locomotives
Diesel Locomotive Works Varanasi Diesel locomotives
Integral Coach Factory Chennai Coaches
Diesel Components Works Patiala Diesel components
Rail Coach Factory Kapurthala Coaches
Wheel and Axle Plant Bangalore Wheels and axles
भारतीय रेल के लाइनो का वर्गीकरण :-
भारत मे रेल लाइन का विस्तार उस रूट के महत्व पर निर्भर करता है। यानि की उस पर कितने यांत्रियों का आवागमन है, कितने महत्वपूर्ण सहर पड़ते है ,और जो शहर पड़ते है उनकी जनसंख्या कितनी है,तथा जहा रेल लाइन बनाया जाएगा वहा का रास्ता कैसा है,इन महत्वपूर्ण कारकों को देखते हुए वह किस प्रकार की रेल लाइन बनानी चाहिए वो निर्भर करता है। यहा हम भारत मे उपयोग हो रहे भिन्न -भिन्न प्रकार के रेल लाइन के विषय मे चर्चा करेंगे।
1-ब्रॉड गेज रूट :-इन्हे भी भिन्न समूहों मे बाटा गया है।
(अ )Group A lines--अधिकतम गति सीमा 160 km/h:
# New Delhi to Howrah by Rajdhani route
# New Delhi to Mumbai Central by Frontier Mail/Rajdhani route
# New Delhi to Chennai Central by Grand Trunk route l
# Howrah to Mumbai VT via Nagpur
(ब )Group B lines
इनकी अधिकतम गति सिमा 130 kmph:
# Allahabad–Itarsi–Bhusaval
# Kalyan–Wadi Raichur–Madras l Kharagpur–Waltair–Vijayawada
# Wadi–Secunderabad–Kazipet
# Howrah–Bandel–Burdwan–Barharwa over Farakka–Malda town
# Barsoi–New Jalpaiguri
# Sitarampur–Kiul–Patna–Mughalsarai
# Kiul–Sahibganj–Barharwa
# Delhi–Ambala Cantt–Kalka
# Ambala Cantt–Ludhiana–Pathankot
# Ambala Cantt–Moradabad–Lucknow–Paratapgarh–Mughalsarai
# Arkonam–Erode–Coimbatore
# Vadodara–Ahemdabad
# Jalapet–Bangalore
2- मीटर गेज रूट :-
मीटर गेज पर 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही ट्रेन चलाया जाता है। इनका उपयोग काम ट्राफिक वाले स्थानों पर तक ही सीमित है। तथा जहा की भोगोलिक स्थिति ठीक नहीं है वहा के लिए ये रेल लाइन उपयोगी है।
आइए एक नजर देखते है भारतीय रेल के साथ कार्य करने वाले विभिन्न एजेंसी
(1)रेल इंडिया टेक्निकल एण्ड इकनॉमिक सर्विस लिमिटेड
(2)इंडियन रेल्वे कन्स्ट्रक्शन कंपनी
(3)इंडियन रेल्वे फाइनैन्स कंपनी
(4)कन्टैनर कॉर्पोरैशन ऑफ इंडिया लिमिटेड
(5)कोंकण रेल्वे कॉर्पोरैशन
(6)इंडियन रेल्वे केटरिंग एण्ड टुरिज़म कॉर्पोरैशन लिमिटेड
(7)रेल टेल कॉर्पोरैशन
(8)रेल विकास निगम लिमिटेड
(9)सेंटर फॉर रेल्वे इनफार्मेशन सिस्टम
(10)इंडियन रेल्वे वेल्फेयर संस्थान
ये सब संस्थान indian railway में अपनी कार्य को तत्परता के साथ करती है,तभी तो हम आसानी के साथ एक जगह से दूसरे जगह पहुच जाते । अगले आर्टिकल मे हम रेल्वे के अन्य बहुत महत्वपूर्ण रोचक जानकारियों को आपके साथ साझा करेंगे।


