वाइल्ड हिबिस्कस :-ये अपने खट्टे गुड के कारण हम लोगों के बीच काफी पसंदीदा है। चाहे हैदराबाद हो या फिर बिहार का पटना हर जगह इसका स्वाद का चटखारा उपलब्ध है। इस पौधे के पत्तों को साग या गोनगुरा कहते है। मराठ वाडा मे इसे "अंबाड़ी"कहते है तो बिहार मे इसको "कुंद्राम" व तेलगु मे 'गुनगुरा 'व अंग्रेजी मे रोससेला । अब बात करते है। इसके उपयोग की यानि इसको कैसे खाया जाता है। तेलंगाना के हैदराबाद मे इसके पत्तों का आचार बना कर खाया जाता है। जिसका स्वाद खट्टा व थोड़ा चटखारा होता है। बैकरी व पैस्ट्री मे पुडींग करने के काम आता है। तथा नॉर्थ -ईस्टर्न भारतीय शहरों मे इसका खपत बहुत अधिक होता है। और तो और इसका रोटी व पकोड़े बनाने मे भी उपयोग किया जाता है। इसके अन्य उपयोग के बारे मे बात करे तो इसका चाय बनाने मे भी उपयोग होता है। यह ब्लड शुगर लेवल को माडरेट रखता है। और आपकी किडनियों को भी रिफ्रेश करता है। ये विटामिन c का बहुत ही अच्छा सोर्स है। आप रोससेला हिबिस्कस का पौधा आप आसानी से किसी भी ई -कॉमर्स साइट पर खरीद सकते है। ये फूल जोड़ों के दर्द के लिए भी उपयोगी है।
गुलकंद का फूल "गुलाब ";-
कमल का फूल :-
यह भारत का राष्ट्रीय पुष्प है। संस्कृत मे इसका नाम पद्म ,पंकज सरोज ,जलज ,व की अन्य दर्जनों नाम है। फारसी मे कमल को 'नीलोफर "कहते है। चाइनीज मे इसे वाटर -लिली के भी नाम से भी जाना जाता है। कमल भारत के सभी उष्ण भागों मे तथा ईरान व ऑस्ट्रेलिया मे भी पाया जाता है। ये पुष्प कई रंगों मे हमारे परिवेश मे उपलब्ध है। इस फूल का उपयो पूजा पाठों,भोजन पकाने व वस्त्र बनाने भी उपयोग होता है। इसके रेशों से बने कपड़ों को पहनने से की प्रकार के त्वचा रोगों से मुक्ति होती है। ये पुष्प किचड युक्त जलाशय मे पाया जाता है क्युकी इसके जड़े काम ऑक्सईजन वाले जल मे ही विकशीत होते है । इसके तनो से बहुत ही स्वादिस्ट व्यंजन बनाया जाता है।
इसका तना खोखला होता है । जिसका आचार व सब्जी बनाने मे उपयोग किया जाता है। इसमे बहुत प्रकार के मिनेरल्स व विटामिन पाए जाते है। इससे रोग प्रतिरोधक छमता तो बढ़ती ही है साथ ही साथ कब्ज व गैस जैसे पेट की समस्याओ का भी अंत तुरंत हो जाता है। अगर आप मोटापा के शिकार है तो भी ये आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा । अगर आप के शरीर मे हीमोग्लोबिन की मात्र भी काम है तो इसके सेवन से आपके शरीर मे रेड ब्लड सेल भी बढाता है। इसमे एंटी-ऑक्सीडेंट बहुत ही अधिक मात्र मे होता है। जिससे ये आप के मोटापे को नियंत्रित करता है।
सनई के फूल :-
सनई से आप सभी परिचित है। इसका प्रयोग अनाज वाले बैग को बनाने मे प्रयोग होता है। तथा भारतीय गाव मे चारपाई को बुनने मे भी इसका इस्तेमाल होता है। ये मुख्यतः बिहार,पश्चिम बंगाल,व उत्तर प्रदेश मे भी आंशिक रूप से उगाया जाता है। ये जुट से मिलता जुलता है। परंतु लोग जुट (पटसन ) तथा सनई को एक ही समझ लेते है। इसे जुट की ही तरह पोखर या जलाशयों मे सड़ाया जाता है। इसके पौधों को व्यापक रूप मे हरी खाद बनाने मे भी किया जाता है। सनई के फूल की सब्जी अगर अपने अब तक नहीं खाई हो। तो काम से काम एक बार इसे जरूर आजमाए ये सब्जी आपको जरूर पसंद आएगी । अमूमन इसकी सब्जी आपको बाजार मे ठंडी के समय आसानी से मिल सकती है। इस सब्जी को आप रोटी या फिर चावल के साथ लुफ़त उठा सकते है।
नयनतारा :-
ये फूल देखने मे तो जंगली लगती है। पर ये फूल उपयोगी बहुत होती है। इसका उपयोग मधुमेह के रोगी को करनी चाहिए । हालांकि ये फूल इतना अधिक स्वाद वाला नहीं होता लेकिन इतने अच्छे गुणों के कारण इस फूल को इस लेख मे सम्मिलित करना पड़ा ।
पनीर के फूल :-
मे इस फूल को इस आर्टिकल मे इसलिए जोड़ रहा हु क्युकी इसका स्वाद तो अच्छा नहीं होता है। और इससे कोई पकवान या व्यंजन नहीं बनाए जा सकते लेकिन ये फूल हामारे लिए बहुत उपयोगी होता है। आज कल व्यस्त जीवन मे मधुमेह रोग का होना बहुत ही आम हो गया है। ज्यादा उम्र के लोगों के साथ साथ ये बीमारी अब कम उम्र के लोगों को भी हो रहा है। ऐसे मे ये एक अचूक दावा के रूप मे आप के काम आ सकती है।इस फूल को पनीर डोडा या इंडियन रेनेट के नाम से भी जानते है। मधुमेह रोग मे इंसुलिन की भारी मात्र मे कमी आ जाती है। ये फूल आपके शरीर मे इंसुलिन की कमी की पूर्ति करता है। यह वनस्पति विज्ञान के सोलोनेसी परिवार का पौधा है। जो भारत के अलावा पाकिस्तान व अफगानिस्तान मे आसानी से उगता है। इस फूल मे मूत्र वर्धक गुड भी होते है। जो इस फूल को और भी बहुत उपयोगी बनाती है।
और की अन्य फूल जैसे :-रजनीगंधा,अमलतास,केवड़ा व अन्य की ऐसे पुष्प है जिनका उपयोग कई प्रकार के रोगों मे औषधि के रूप मे प्रयुक्त होती है। आशा करता हु की आप को ये आर्टिकल पसंद आई होगी । आप इस आर्टिकल के बारे मे हमे कमेन्ट कर सकते है। या फिर हमे आप अपने अनमोल सुझाव भी दे सकते है। यह हम इस आर्टिकल को समाप्त करते है। और तुरंत आपको एक नया और मसालेदार आर्टिकल के साथ इस वेबसाईट पर फिर हाजिर होंगे।



